Repo Rate- अगर आपके घर की मासिक बजट डायरी में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI दर्ज है, तो यह खबर आपके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान ला सकती है। अक्सर महीने की शुरुआत EMI के मैसेज से होती है और दिल में एक ही सवाल उठता है—कहीं किस्त बढ़ तो नहीं गई? ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के ताज़ा फैसले ने फिलहाल राहत दी है। Repo Rate को 5.25% पर स्थिर रखा गया है, यानी अभी लोन महंगे होने की चिंता नहीं है।
RBI का फैसला क्या कहता है और इसका मतलब क्या है
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने फरवरी 2026 की बैठक में Repo Rate को 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश की अर्थव्यवस्था संतुलित रफ्तार से आगे बढ़ रही है और महंगाई भी तय दायरे में बनी हुई है। RBI ने अपनी Neutral Policy Stance जारी रखते हुए यह संकेत दिया है कि RBI फिलहाल न तो ब्याज दर बढ़ाना चाहता है न ही जल्दी कम करना चाहता है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी यह इशारा दिया कि ब्याज दरें कुछ समय तक निचले स्तर पर रह सकती हैं। इसका मतलब यह है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल “देखो और इंतजार करो” की रणनीति पर चल रहा है, ताकि ग्रोथ और महंगाई के बीच सही संतुलन बना रहे।
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है
Repo Rate स्थिर रहने का सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जिनके लोन फ्लोटिंग रेट से जुड़े होते हैं। जब यह दर नहीं बढ़ती, तो बैंकों की उधारी लागत भी स्थिर रहती है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में अचानक उछाल आने की संभावना कम हो जाती है।

इस फैसले के बाद जिन लोगों की EMI चल रही है, उन्हें फिलहाल बढ़ोतरी का डर नहीं है। जो लोग नया लोन लेने की सोच रहे हैं, वे भी राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि ब्याज दरों में अचानक वृद्धि की आशंका नहीं दिख रही। यही वजह है कि यह निर्णय रियल एस्टेट, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस फैसले का असर तीन तरह से देखा जा सकता है-
- पहला नया लोन लेने वालों को अचानक महंगें ब्याज का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- दूसरा मौजूदा लोन वालों की EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी।
- तीसरा निवेश बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है।
RBI का यह कदम खासकर उन लोगों के लिए राहतभरा है जो फ्लोटिंग रेट लोन पर है, क्योंकि फ्लोटिंग रेट सीधे Repo Rate से जुड़ा होता है।
2025 की कटौतियों से 2026 की स्थिरता तक
अगर पिछले साल पर नजर डालें तो 2025 में ब्याज दरों में कई चरणों में कटौती की गई थी। उस दौरान Repo Rate 6.5% से घटते-घटते 5.25% तक पहुंच गया। इन कटौतियों का मकसद अर्थव्यवस्था को गति देना, खपत बढ़ाना और निवेश को प्रोत्साहन देना था। धीरे-धीरे इन फैसलों का असर बैंकों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचा और कई लोगों की EMI कम हुई।
अब 2026 में दरों को स्थिर रखकर RBI यह देखना चाहता है कि पहले की कटौतियों का पूरा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ता है। यह कदम स्थिरता और भरोसे का संकेत देता है।
Repo Rate क्या होता है और क्यों अहम है
Repo Rate वह दर है जिस पर बैंक केंद्रीय बैंक से पैसा उधार लेते हैं। जब यह दर कम होती है तो बैंक सस्ता लोन दे सकते हैं, और जब यह बढ़ती है तो लोन महंगे हो जाते हैं। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) हर दो महीने में बैठक करती है। इस कमेटी में कुछ 6 सदस्य होते हैं। RBI और सरकार दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

MPC फैसले लेते समय कई सारी चीजें देखती है-
- GDP ग्रोथ
- ग्लोबल इकाॅनमी
- घरेलू मांग
- महंगाई दर
आपको बता दें कि 2026 में MPC ने यह माना कि अभी की Repo Rate अर्थव्यवस्था के लिए सही संतुलन बना रही है। इसलिए दरों को स्थिर रखा गया।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले महीनों में अगर महंगाई नियंत्रित रहती है और विकास दर मजबूत बनी रहती है, तो भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बन सकती है। हालांकि RBI जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठाना चाहता। उसका फोकस साफ है—महंगाई पर नियंत्रण, विकास को समर्थन और वित्तीय प्रणाली में स्थिरता।
कुल मिलाकर, यदि आपके ऊपर लोन चल रहा है या आप नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो फिलहाल हालात आपके पक्ष में हैं। EMI में अचानक बढ़ोतरी का डर नहीं है। फिर भी समझदारी इसी में है कि किसी भी वित्तीय फैसले से पहले अपनी आय, खर्च और लंबी अवधि की योजना को ध्यान में रखें।
डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी को वित्तीय सलाह न माना जाए। किसी भी लोन या निवेश से संबंधित निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या संबंधित बैंक से परामर्श अवश्य करें।


